Siddha Kunjika Stotra in Hindi Lyrics PDF | सिद्ध कुन्जिका स्तोत्रं
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र: महत्व, अर्थ, लाभ एवं सम्पूर्ण जानकारी
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र क्या है?
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र देवी दुर्गा की उपासना से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पूजनीय स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को बताया गया माना जाता है और इसे दुर्गा सप्तशती का गूढ़ एवं सारभूत स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र का पाठ देवी साधना को जागृत करने और माँ चण्डिका की कृपा प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम माना जाता है।
“कुन्जिका” शब्द का अर्थ है “कुंजी” अर्थात वह चाबी जो किसी गुप्त ज्ञान या शक्ति के द्वार को खोलती है। इसी कारण इसे दुर्गा सप्तशती की कुंजी भी कहा जाता है।
माँ दुर्गा के बारे में
माँ दुर्गा को आदिशक्ति, जगदम्बा और समस्त सृष्टि की ऊर्जा का स्वरूप माना जाता है। वे धर्म की रक्षा करने वाली, भक्तों के कष्ट दूर करने वाली तथा दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली देवी हैं। देवी के अनेक रूप हैं, जिनमें चण्डिका, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री विशेष रूप से पूजनीय हैं।
Siddha Kunjika Stotra in Sanskrit/Hindi Lyrics
सिद्धकुन्जिका स्तोत्रं
शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः भवेत् ॥१॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥२॥
कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् ।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ॥३॥
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति ।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम् ।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥४॥
अथ मन्त्रः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा
इति मन्त्रः॥
नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि ॥१॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन ॥२॥
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे ।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका ॥३॥
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी ॥४॥
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण ॥५॥
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी ।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देविशां शीं शूं मे शुभं कुरु ॥६॥
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी ।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः ॥७॥
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा ॥८॥
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिंकुरुष्व मे ॥
इदंतु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे ।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति ॥
यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत् ।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा ॥
इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती
संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्णम् ॥
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र का अर्थ
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र देवी की दिव्य शक्ति का आह्वान करने वाला स्तोत्र है। इसमें विभिन्न बीज मंत्रों और देवी की महिमा का वर्णन मिलता है। यह स्तोत्र साधक को देवी शक्ति के प्रति समर्पण, श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश देता है।
धार्मिक दृष्टि से इसे दुर्गा सप्तशती के गूढ़ रहस्यों को समझने और देवी की कृपा प्राप्त करने का सरल माध्यम माना जाता है।
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र का महत्व
देवी उपासना में सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र का विशेष महत्व बताया गया है। अनेक साधक इसे दुर्गा सप्तशती के पाठ से पूर्व या उसके साथ पढ़ते हैं। मान्यता है कि यह स्तोत्र साधना में एकाग्रता, भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है।
यह स्तोत्र देवी चण्डिका के प्रति समर्पण और देवी कृपा की प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है।
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र का पाठ कब करें?
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र का पाठ वर्ष भर किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन निम्न अवसर विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं:
चैत्र और शारदीय नवरात्रि
अष्टमी और नवमी तिथि
शुक्रवार के दिन
दुर्गा पूजा के समय
देवी साधना और जप के दौरान
विशेष मनोकामना या आध्यात्मिक साधना के समय
प्रातःकाल और सायंकाल दोनों समय इसका पाठ किया जा सकता है।
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र का पाठ कैसे करें?
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
माँ दुर्गा या माँ चण्डिका के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।
देवी का ध्यान करें और आशीर्वाद की प्रार्थना करें।
श्रद्धा और एकाग्रता के साथ सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र का पाठ करें।
पाठ पूर्ण होने पर देवी को प्रणाम करें और कल्याण की कामना करें।
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र के लाभ
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र देवी साधना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तोत्र माना जाता है। इसे दुर्गा सप्तशती की कुंजी के रूप में सम्मान दिया जाता है। नियमित श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्त देवी के प्रति अपनी भक्ति को मजबूत कर सकते हैं और आध्यात्मिक शांति, आत्मबल तथा सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं।
FAQ (English)
1. What is Siddha Kunjika Stotram?
Siddha Kunjika Stotram is a sacred hymn dedicated to Goddess Durga and is traditionally regarded as the key to understanding and invoking the power of Durga Saptashati.
2. Who is Goddess Durga?
Goddess Durga is the Divine Mother and embodiment of Shakti, worshipped for strength, protection, wisdom, and victory over negativity.
3. What is the meaning of Siddha Kunjika Stotram?
The term “Kunjika” means a key. The stotram is believed to unlock the spiritual essence of Devi worship and devotion.
4. When should Siddha Kunjika Stotram be recited?
It can be recited daily and is especially auspicious during Navratri, Fridays, Ashtami, Navami, and Devi worship rituals.
5. How do you recite Siddha Kunjika Stotram?
After bathing and offering prayers to Goddess Durga, recite the stotram with devotion, concentration, and a peaceful mind.
6. What are the benefits of Siddha Kunjika Stotram?
Devotees believe it promotes inner peace, spiritual growth, confidence, positive energy, and divine blessings.
7. Why is Siddha Kunjika Stotram important?
It is considered an important hymn in Devi worship and is traditionally associated with the spiritual essence of Durga Saptashati.
8. Can anyone recite Siddha Kunjika Stotram?
Yes, anyone can recite it with faith, sincerity, and devotion to Goddess Durga.
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