Vishnu Aarti in Hindi & English Lyrics PDF | ॐ जय जगदीश हरे
Vishnu Aarti: विष्णु जी की आरती, अर्थ, विधि और लाभ
1. Introduction – Vishnu Aarti का परिचय
Vishnu Aarti भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्ति, सम्मान और समर्पण से जुड़ी एक पवित्र पूजा परंपरा है। भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनकर्ता, धर्म के रक्षक, भक्तों के सहायक और लक्ष्मीपति के रूप में पूजा जाता है। वे नारायण, हरि, जगदीश, वासुदेव, माधव, गोविंद और श्रीपति जैसे अनेक दिव्य नामों से जाने जाते हैं।
हिंदू धर्म में आरती पूजा का एक महत्वपूर्ण भाग मानी जाती है। इसमें भक्त दीपक या कपूर की ज्योति भगवान के सामने घुमाकर उनकी स्तुति करता है। यह ज्योति अज्ञान से ज्ञान, दुख से शांति और नकारात्मकता से शुभता की ओर जाने का प्रतीक मानी जाती है।
Vishnu Aarti घरों, मंदिरों, सत्यनारायण कथा, गुरुवार पूजा, एकादशी व्रत, पूर्णिमा, पुरुषोत्तम मास, देवउठनी एकादशी और अन्य शुभ अवसरों पर श्रद्धा से गाई जाती है। विशेष रूप से “ॐ जय जगदीश हरे” को भगवान विष्णु की सबसे लोकप्रिय आरतियों में माना जाता है। यह आरती भक्त के मन में विश्वास, शरणागति और भगवान की कृपा का भाव जगाती है।
भगवान विष्णु की आरती केवल एक धार्मिक गीत नहीं है, बल्कि यह भक्त के भीतर यह भावना पैदा करती है कि जीवन की हर परिस्थिति में भगवान नारायण ही रक्षा, मार्गदर्शन और पालन करने वाले हैं।
Popular Vishnu Aarti in Hindi and English with Meaning
नीचे भगवान विष्णु से जुड़ी कुछ लोकप्रिय आरतियों और स्तुतियों के नाम Hindi, English transliteration और सरल अर्थ के साथ दिए गए हैं। अलग-अलग परिवारों और मंदिरों में परंपरा के अनुसार इनमें से कोई भी आरती गाई जा सकती है।
1. ॐ जय जगदीश हरे
Vishnu Aarti in Hindi Lyrics
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
ॐ जय जगदीश हरे ।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का ।
स्वामी दुःख विनसे मन का ।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥
ॐ जय जगदीश हरे ।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी ।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी ॥
ॐ जय जगदीश हरे ।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।
स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी ॥
ॐ जय जगदीश हरे ।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता ।
स्वामी तुम पालन-कर्ता ।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता ॥
ॐ जय जगदीश हरे ।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति ।
स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति ॥
ॐ जय जगदीश हरे ।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे ।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे ।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे ॥
ॐ जय जगदीश हरे ।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा ।
स्वमी पाप हरो देवा ।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा ॥
ॐ जय जगदीश हरे ।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे ।
स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे ॥
ॐ जय जगदीश हरे ।
Vishnu Aarti in English Lyrics
Om Jai Jagadiish Hare
Swaami Jai Jagadiish Hare |
Bhakta Jano Ke Sankatt,
Daas Janon Ke Sankatt,
Kssann Me Duur Kare |
Om Jai Jagadiish Hare ||
Jo Dhyaave Phal Paave,
Duhkh-Bin Se Man Kaa,
Swaami Duhkh-Bin Se Man Kaa |
Sukh Sampati Ghar Aave,
Sukh Sampati Ghara Aave,
Kasstta Mitte Tan Kaa |
Om Jai Jagadiisha Hare ||
Maat Pitaa Tum Mere,
Sharann Gahuu Kiskii,
Swaami Sharann Gahuu Maim Kiskii |
Tum Bin Aur Na Duujaa,
Tum Bin Aur Na Duujaa,
Aas Karuu Mai Jiskii |
Om Jai Jagadiish Hare ||
Tum Puurann Paramaatmaa,
Tum Antarayaamii,
Swaami Tum Antarayaamii |
Paarabrahma Parameshwar,
Paarabrahma Parameshwar,
Tum Sab Ke Swaami |
Om Jai Jagadiish Hare ||
Tum Karunnaa Ke Saagar,
Tum Paalan-Kartaa,
Swami Tum Paalan-Kartaa |
Mai Muurakh Phala-Kaamii
Mai Sevak Tum Swami,
Krpaa Karo Bhartaa |
Om Jai Jagadiish Hare ||
Tum Ho Ek Agocar,
Sabke Praann-Pati,
Swami Sabake Praann-Pati |
Kis Vidh Miluu Dayaamay,
Kisa Vidh Miluu Dayaamay,
Tumko Mai Kumati |
Om Jai Jagadiish Hare ||
Diina-Bandhu Dukh-Hartaa,
Thaakur Tuma Mere,
Swami Rakssak Tum Mere |
Apne Haath Utthaao,
Apne Sharann Lagaao
Dwaar Paddaa Tere |
Om Jai Jagadiish Hare ||
Vissay-Vikaar Mittaao,
Paap Haro Devaa,
Swami Paap Haro Devaa |
Shraddhaa Bhakti Baddhaaao,
Shraddhaa Bhakti Baddhaaao,
Santan Kii Sevaa |
Om Jai Jagadiish Hare ||
Meaning:
इस आरती में भगवान विष्णु को जगदीश यानी संसार के स्वामी के रूप में प्रणाम किया जाता है। भक्त प्रार्थना करता है कि प्रभु भक्तों के संकट दूर करें और जीवन में शांति, कृपा और सुख प्रदान करें।
2. श्री विष्णु भगवान की आरती
Hindi:
जय श्री विष्णु भगवान, जय लक्ष्मी रमण।
पालनकर्ता प्रभु, करिए सबका कल्याण॥
English Transliteration:
Jai Shri Vishnu Bhagwan, Jai Lakshmi Raman
Palankarta Prabhu, Kariye Sabka Kalyan
Meaning:
यह आरती भगवान विष्णु के पालनकर्ता स्वरूप की स्तुति करती है। इसमें भक्त भगवान से संसार, परिवार और अपने जीवन के कल्याण की प्रार्थना करता है।
3. लक्ष्मी नारायण आरती
Hindi:
जय लक्ष्मी नारायण, जय जय श्री नारायण।
भक्तों के रखवाले, करुणा के सागर भगवान॥
English Transliteration:
Jai Lakshmi Narayan, Jai Jai Shri Narayan
Bhakton Ke Rakhwale, Karuna Ke Sagar Bhagwan
Meaning:
यह आरती भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा से जुड़ी है। इसमें सुख, समृद्धि, धर्म, शांति और पारिवारिक मंगल की कामना की जाती है।
4. सत्यनारायण भगवान की आरती
Hindi:
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥
English Transliteration:
Jai Lakshmi Ramana, Swami Jai Lakshmi Ramana
Satyanarayan Swami, Jan Patak Harana
Meaning:
यह आरती सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा के बाद गाई जाती है। इसमें भगवान से पाप, दुख और संकट दूर करने तथा सत्य, धर्म और सुख देने की प्रार्थना की जाती है।
5. श्री हरि आरती
Hindi:
जय जय श्री हरि, जय नारायण।
दीन दयाल प्रभु, भक्तों के पालनहार॥
English Transliteration:
Jai Jai Shri Hari, Jai Narayan
Deen Dayal Prabhu, Bhakton Ke Palanhar
Meaning:
यह आरती भगवान हरि के दयालु और भक्तवत्सल स्वरूप का स्मरण कराती है। इसमें प्रभु से दया, रक्षा और सद्बुद्धि की कामना की जाती है।
6. नारायण आरती
Hindi:
नारायण नारायण जय गोविंद हरे।
नारायण नारायण जय गोपाल हरे॥
English Transliteration:
Narayan Narayan Jai Govind Hare
Narayan Narayan Jai Gopal Hare
Meaning:
यह नाम-स्मरण शैली की आरती भगवान नारायण, गोविंद और गोपाल के दिव्य नामों का उच्चारण करती है। यह मन को भक्ति, शांति और भगवान के नाम में स्थिर करने का सरल माध्यम है।
2. What is Vishnu Aarti?
Vishnu Aarti भगवान विष्णु की पूजा में की जाने वाली दीप-आराधना और स्तुति है। इसमें भक्त भगवान के सामने दीपक, कपूर, धूप, फूल, घंटी, शंख और भजन के माध्यम से अपनी श्रद्धा प्रकट करता है।
आरती का उद्देश्य केवल गीत गाना नहीं है, बल्कि भगवान के प्रति कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करना है। जब भक्त आरती गाता है, तो वह भगवान विष्णु के पालनकर्ता, रक्षक और करुणामय स्वरूप को याद करता है।
Vishnu Aarti घर और मंदिर दोनों जगह की जा सकती है। घर में इसे सरल तरीके से किया जा सकता है, जबकि मंदिरों में यह अधिक विधिपूर्वक होती है। विशेष रूप से गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा, सत्यनारायण कथा, लक्ष्मी-नारायण पूजा और पुरुषोत्तम मास में विष्णु आरती का विशेष महत्व माना जाता है।
सरल शब्दों में Vishnu Aarti वह भक्तिमय पूजा है जिसमें भक्त दीपक की ज्योति और आरती गीत के माध्यम से भगवान श्रीहरि विष्णु को प्रणाम करता है और उनसे जीवन में धर्म, सुख, शांति और संरक्षण की प्रार्थना करता है।
3. Vishnu Aarti का अर्थ
Vishnu Aarti का अर्थ है भगवान विष्णु की ज्योति, स्तुति और भक्ति के साथ पूजा करना। आरती में जलाया गया दीपक शुभता, ज्ञान और ईश्वर कृपा का प्रतीक माना जाता है। जब भक्त भगवान के सामने दीपक घुमाता है, तो वह भाव रखता है कि प्रभु मेरे जीवन के अंधकार, दुख और भ्रम को दूर करें।
“ॐ जय जगदीश हरे” में “जगदीश” का अर्थ है संसार के स्वामी। “हरे” भगवान विष्णु का एक पवित्र नाम है, जिसका भाव है दुख, पाप और संकट हरने वाले प्रभु। इस आरती में भक्त कहता है कि जो भगवान का ध्यान करता है, उसे फल प्राप्त होता है और मन का दुख दूर होता है।
Vishnu Aarti में भगवान विष्णु की दया, पालन, रक्षा, करुणा और भक्तों के संकट दूर करने की शक्ति का वर्णन होता है। इसमें भक्त भगवान से धन, सुख और समृद्धि के साथ-साथ सद्बुद्धि, शांति, भक्ति और धर्ममय जीवन की भी प्रार्थना करता है।
इसका गहरा अर्थ यह है कि मनुष्य अपने अहंकार, चिंता और असुरक्षा को भगवान नारायण के चरणों में रखकर उनसे मार्गदर्शन मांगता है। आरती भक्त को याद दिलाती है कि जीवन में सच्ची सुरक्षा केवल बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति और भगवान की कृपा से मिलती है।
4. Vishnu Aarti कब और कैसे करें?
Vishnu Aarti किसी भी दिन श्रद्धा से की जा सकती है, लेकिन गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा, देवउठनी एकादशी, निर्जला एकादशी, पुरुषोत्तम मास, सत्यनारायण कथा और लक्ष्मी-नारायण पूजा के दिन इसका विशेष महत्व माना जाता है। सुबह की पूजा और शाम की संध्या आरती दोनों समय Vishnu Aarti की जा सकती है।
घर में विष्णु आरती करने के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें। भगवान विष्णु, लक्ष्मी-नारायण, श्रीहरि, सत्यनारायण या शालिग्राम जी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ स्थान पर रखें। पीला या सफेद कपड़ा बिछाना शुभ माना जाता है, क्योंकि भगवान विष्णु को पीताम्बरधारी माना जाता है।
पूजा में तुलसी पत्र, पीले फूल, चंदन, धूप, दीप, फल, पंचामृत, मिश्री या सात्त्विक भोग अर्पित करें। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय मानी जाती है, इसलिए विष्णु पूजा में तुलसी पत्र का विशेष महत्व है।
आरती से पहले “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जप करें। इसके बाद दीपक या कपूर जलाकर भगवान के सामने आरती घुमाएं। आरती करते समय घंटी बजाएं और शांत मन से “ॐ जय जगदीश हरे” या अपनी परंपरा की विष्णु आरती गाएं।
वास्तु दृष्टि से पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है। पूजा स्थान साफ, शांत और सुगंधित होना चाहिए। आरती के बाद भगवान को प्रणाम करें, प्रसाद अर्पित करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।
आरती में सबसे महत्वपूर्ण बात भाव है। यदि विधि पूरी तरह न भी आती हो, फिर भी साफ मन, श्रद्धा और प्रेम से की गई Vishnu Aarti शुभ मानी जाती है।
5. Vishnu Aarti के लाभ
Vishnu Aarti का नियमित गायन मन में शांति, विश्वास और सकारात्मकता बढ़ाने वाला माना जाता है। भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता माने जाते हैं, इसलिए उनकी आरती भक्त को यह भाव देती है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी प्रभु रक्षा और मार्गदर्शन करने वाले हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार Vishnu Aarti से घर में शुभता, संतुलन और सात्त्विक ऊर्जा बढ़ती है। जब घर में दीपक, धूप, मंत्र और आरती की ध्वनि होती है, तो वातावरण शांत और भक्तिमय बनता है। इससे परिवार के सदस्यों के मन में भक्ति, संयम और सकारात्मक सोच बढ़ सकती है।
विष्णु आरती का एक प्रमुख लाभ मानसिक स्थिरता है। दिनभर की भागदौड़, चिंता और तनाव के बाद संध्या समय आरती करने से मन शांत होता है। भगवान के नाम का स्मरण व्यक्ति को भय, असुरक्षा और नकारात्मक विचारों से दूर करने में सहायक हो सकता है।
परिवार और गृहस्थ जीवन के लिए भी Vishnu Aarti शुभ मानी जाती है। लक्ष्मी-नारायण की पूजा से सुख, समृद्धि, शांति और धर्ममय जीवन की कामना की जाती है। सत्यनारायण कथा या गुरुवार पूजा के बाद विष्णु आरती करने से भक्त के मन में कृतज्ञता और संतोष का भाव बढ़ता है।
आध्यात्मिक रूप से Vishnu Aarti भक्त को शरणागति, सेवा, नाम-स्मरण और धर्म से जोड़ती है। यह व्यक्ति को याद दिलाती है कि भगवान की कृपा पाने के लिए केवल बाहरी पूजा नहीं, बल्कि सत्य, दया, संयम, ईमानदारी और अच्छे कर्म भी जरूरी हैं। इसलिए Vishnu Aarti को मन, परिवार और घर के वातावरण को पवित्र बनाने वाली सरल और प्रभावी साधना माना जा सकता है।
FAQs in English
1. What is Vishnu Aarti?
Vishnu Aarti is a devotional worship ceremony dedicated to Lord Vishnu. In this ritual, devotees offer a lighted lamp, incense, flowers, sound, and prayers while singing Vishnu aarti. It is performed to honor Lord Vishnu and seek His blessings, protection, peace, and guidance.
2. What is the meaning of Vishnu Aarti?
The meaning of Vishnu Aarti is to worship Lord Vishnu through light, devotion, and praise. The lamp represents divine wisdom and positivity. Popular aartis like “Om Jai Jagdish Hare” praise Lord Vishnu as Jagdish, the Lord of the universe, who removes the troubles of His devotees.
3. When should Vishnu Aarti be performed?
Vishnu Aarti can be performed daily in the morning or evening. Auspicious days include Thursday, Ekadashi, Purnima, Dev Uthani Ekadashi, Purushottam Maas, Satyanarayan Puja, and Lakshmi-Narayan worship. Many devotees perform it after completing daily puja or katha.
4. How to perform Vishnu Aarti at home?
To perform Vishnu Aarti at home, clean the puja place, place an idol or picture of Lord Vishnu, Lakshmi Narayan, Satyanarayan, or Shaligram Ji, light a diya, offer tulsi leaves, yellow flowers, fruits, panchamrit, or sattvik bhog, and sing Vishnu Aarti with devotion.
5. What are the benefits of Vishnu Aarti?
The benefits of Vishnu Aarti include mental peace, positive energy at home, family harmony, devotion, spiritual strength, and a deeper connection with Lord Vishnu. Devotees believe regular aarti brings divine grace, protection, prosperity, and emotional balance.
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